ईवी बैटरी स्वैपिंग नीति लागू की जा सकती है और आम लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।

SP Yadav

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग नीति क्या है और इससे आम आदमी को कैसे लाभ हो सकता है, बैटरी स्वैपिंग नीति के तहत, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी को दुसरे चार्ज किए गए बैटरी से बदला जाएगा इसका मतलब होगा कि आप अपने वाहन की बैटरी नहीं चार्ज करने जाने होंगे। इससे आपके लिए अनेक लाभ होंगे। इससे पहले चार्ज किए गए बैटरियों को एक छोटे से स्टोर के माध्यम से स्थायी रूप से संचार के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे आपके लिए एक और विकल्प उपलब्ध होगा, जिससे आप लंबे समय तक संचार कर सकते हैं।

इस नीति के माध्यम से, आप अपने वाहन के लिए बैटरी किराए पर भी ले सकते हैं और इससे आपके लिए अधिक संभवता होगी कि आप अपने वाहन को इलेक्ट्रिक के रूप में खरीदें। इसके अलावा, इससे बैटरी स्वैपिंग के लिए स्पेशल स्टेशन भी खोले जाएंगे।

EV बैटरी स्वैपिंग नीति एक प्रणाली है जिसमें वाहनों के बैटरी पैक को त्वरित रूप से बदलने के लिए एक नेटवर्क बनाया जाता है। इसका मकसद यह होता है कि उपयोगकर्ताओं को अपनी बैटरी भराई के लिए समय नहीं लगाना पड़ता है और उन्हें त्वरित रूप से नयी बैटरी प्रदान की जाती है।

इस नीति के लाभों में से एक है कि उपयोगकर्ताओं को बैटरी के लिए पूर्णतः नए वाहनों की खरीद करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा, स्वैपिंग नेटवर्क वाहनों के बैटरी पैक के लंबे समय तक के उपयोग से होने वाली विस्फोट और त्वरित बैटरी भराई के लिए लंबी कतारों के नुकसान को कम करता है।

हालांकि, इस नीति की अंतिम स्थिति अभी तक तय नहीं है और कुछ बिंदुओं पर विवाद भी है। उदाहरण के लिए, एक बैटरी स्वैपिंग सिस्टम को चलाने के लिए एक महंगी बैटरी स्वैपिंग स्टेशन का उपयोग किया जा सकता है।

“सरकार ने बजट में EV Battery Swapping Policy लाने और बैटरी स्वैपिंग को इंटरऑपरेबल बनाने की घोषणा करके देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया है। Niti Aayog ने हाल ही में इस पॉलिसी के बारे में एक अहम बैठक की, जिसमें इस पॉलिसी में शामिल किए जाने वाले जरूरी मुद्दों पर चर्चा की गई। जल्द ही इस पॉलिसी को लागू किया जाएगा। इस पॉलिसी से आम आदमी को क्या फायदा होगा और इसमें कौन-कौन सी बातें शामिल होंगी, इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय है।”

Battery Swapping क्या है?

Battery Swapping का मतलब होता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के बैटरी को स्वैप कर दूसरी बैटरी से बदल दिया जाता है। इसमें वाहन चालक को जीरो चार्ज बैटरी को स्वैपिंग स्टेशन पर फुल चार्ज बैटरी से बदलने की सुविधा मिलती है। इस व्यवस्था में बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के माध्यम से बैटरी के फिटिंग आदि का ध्यान रखा जाता है। यह व्यवस्था बहुत ही उपयोगी होती है क्योंकि इससे बैटरी चार्जिंग के लिए बहुत समय बचता है और लंबी दूरी तय की जा सकती है।

हालांकि, बैटरी स्वैपिंग व्यवस्था को लागू करने की अन्य कुछ चुनौतियों के साथ, एक और चुनौती बैटरी स्वैपिंग स्टेशन की आवश्यकता होती है। इसे स्थापित करने के लिए भूमि, इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों के साथ सहयोग आदि की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी विशेष प्रबंधन व्यवस्था वाले होते हैं जो बैटरी स्वैपिंग, भुगतान और बैटरी अद्यतनीकरण सहित अन्य गतिविधियों के लिए उपलब्ध होते हैं।

आगामी बैटरी स्वैपिंग नीति के संदर्भ में नीति आयोग की बैठक का क्या महत्व है?

अभी तक बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के लिए अंतिम रूप तक तैयार नहीं हुआ है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, नीति आयोग की बैठक में कुछ मुख्य सुझाव पेश किए गए थे। इन सुझावों में बैटरी स्वैपिंग सिस्टम के लिए स्टैंडर्ड बनाने की मांग शामिल थी, जिससे एक ही स्वैपिंग स्टेशन की बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस्तेमाल की जा सके। इसके अलावा, बैटरी स्वैपिंग की खरीदारी को सरल और आसान बनाने के लिए विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं।

इसके साथ ही, बैटरी स्वैपिंग सिस्टम की सुविधा से लाभ उठाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों को उनके स्वयं के स्वैपिंग स्टेशन लगाने के लिए इंसेंटिव देने की भी सम्भावना है।

इस नीति के लागू होने से पहले अभी और कुछ समय लग सकता है, क्योंकि इसे संबंधित सभी स्टेकहोल्डर्स के सुझाव और राजनीतिक समीकरण के साथ संविधानिक प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम रूप।

बैटरी स्वैपिंग मे इंटरऑपरेबिलिटी क्या है?

इंटरऑपरेबिलिटी का काम करने का तरीका होगा ऐसा कि किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी को ब्रांड या कंपनी को देखे बिना किसी भी दूसरे इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार बैटरी के आकार और क्षमता के लिए एक स्टैंडर्ड बना सकती है जिससे ग्राहक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पर आसानी से अपनी बैटरी को एक्सचेंज कर सकेंगे। इसके लिए, बैटरी के पैक, कनेक्टर, सॉफ्टवेयर के साथ सामंजस्य के मानक भी तय होंगे ताकि नई बैटरी को लगाते ही वह वाहन के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और मोटर कंट्रोलर के साथ मिलकर काम करने लगे। इससे बैटरियों का मानक तय होगा और जोखिम कम होगा। The International Council on Clean Transportation के इंडिया मैनेंजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट ने इसके बारे में बताया है।

बैटरी स्वैपिंग नीति से नए बिजनेस मॉडल का जन्म हो सकता है इलेक्ट्रिक व्हीकल उद्योग में

भारत सरकार ने हाल ही में अपनी नई नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग का प्रस्ताव रखा है। इस नीति के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग सिस्टम को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे वाहनों के बैटरी के चार्जिंग समय को कम किया जा सकेगा और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी लाइफ भी बढ़ जाएगी। इस नीति को लाने के बाद, बैटरी स्वैपिंग ऑपरेटर (BSO) जैसे नए तरह के कारोबार का जन्म होगा, क्योंकि प्रस्तावित नीति में सरकार बैटरी एज ए सर्विस (BaaS) का नया बिजनेस मॉडल ला सकती है।

इससे लोगों को गाड़ी के साथ बैटरी खरीदने और नहीं खरीदने का ऑप्शन मिलेगा और जो ग्राहक बैटरी नहीं खरीदेंगे, वे इसे किराये पर लेकर इस्तेमाल कर सकेंगे। इस बारे में RMI (रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट) की मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षिमा टी. घाटे का कहना है कि बैटरी स्वैपिंग इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर्स और 3 व्हीलर्स के लिए फायदेमंद है।

यह नीति इलेक्ट्रिक वाहनों के बैटरी स्वैपिंग सेवा को बढ़ावा देने और इससे बैटरी संबंधी चुनौतियों को दूर करने के लिए एक कदम है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में बैटरी के लिए ज्यादा खर्च नहीं होगा और उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार बैटरी स्वैपिंग सेवा लेने का विकल्प मिलेगा। इससे बैटरी संबंधी चुनौतियों जैसे कि अधिक भार और दुर्यावधि से चार्ज करने की आवश्यकता को दूर किया जा सकता है। इससे ये वाहन और भी अधिक उपयोगी हो सकते हैं।

इस नीति के अनुसार, बैटरी स्वैपिंग ऑपरेटर के रूप में नए व्यवसायों की उत्पत्ति हो सकती है और यह बैटरी एज ए सर्विस (BaaS) का नया बिजनेस मॉडल भी प्रदान कर सकती है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यापक उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे इन वाहनों का बाजार भी विस्तार करने में मदद मिलेगी।

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